Raj Shekhar (Lyrics Wale )

Hindi Lyrics Writer

May Day

मई दिवस

मेरे कुछ साथी हैं

साथी क्या हैं..भाई हैं

हम साथ ही थे स्लेट और चॉक के मौसम तक

फिर मेरे हाथों  में किताब आई उनके हाथों में हंसिया..

….

मैं शहर में  नफ़ा नुकसान के शब्द उगाने लगा दिहाड़ी पर,

और वो  खेत-दर-खेत

लिखते रहे गीत

हर मौसम

रबी, खरीफ और गरमा  के छंदों  में

धान-गेंहू-मक्के का लोकगीत

महाकाव्यात्मक …

बीज रोपते, फ़सल काटते

भुट्टा उगाते, दाना  छुड़ाते

उन बरकत भरे हाथों को छूने के लिए भी

मुझ शहरी को अब दूर जाना होता है..

भाई, मेरे शब्द तुम्हारे हाथ चूमना चाहते हैं…

My favourite Poems..

दिल्ली,लखनऊ, इलाहबाद, बनारस और बस्ती.. इन शहरों पर सर्वेश्वर
 

पांच नगर – प्रतीक

 

दिल्ली-

कच्चे रंगों में नफ़ीस

चित्रकारी की हुई , कागज की एक डिबिया

जिसमें नकली हीरे की अँगूठी

असली दामों के कैशमेमो में लिपटी हुई रखी है ।

 

लखनऊ-
श्रृंगारदान में पड़ी

एक पुरानी खाली इत्र की शीशी

जिसमें अब महज उसकी कार्क पड़ी सड़ रही है ।

 

बनारस-
बहुत पुराने तागे में बंधी एक ताबीज़,

जो एक तरफ़ से खोलकर

भाँग रखने की डिबिया बना ली गयी है ।

इलाहाबाद-
एक छूछी गंगाजली

जो दिन-भर दोस्तों के नाम पर

और रात में कला के नाम पर

उठायी जाती है ।

बस्ती-

गांव के मेले में किसी

पनवाड़ी की दुकान का शीशा

जिस पर अब इतनी धूल जम गयी है

कि अब कोई भी अक्स दिखाई नहीं देता ।

-सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

नौ चाँद बीते…

नौ चाँद बीते…

रातें अब तक
काली काली
ख़ाली ख़ाली
झींगुर कुतर जाया करती थी
फिर,
तुम्हारे सपनो ने रातों को खबर दी
कि तुम आ रहे हो- सच में..

रात ने शाम से कुछ वक़्त उधार मांगे
सूरज से गुज़ारिश की कि वो जल्दी डूबे
चाँद से कहा “तुम रोज़ आ जाओ न प्लीज़ “
जुगनुओं की रानी को बीते सालों का वास्ता दिया
तब लाख जुगनुओं से ज़मीं पर सितारे छिड़क दिए
अब बावली रात फाख्ते की तरह कूदती रहती है-
रात रानी की हल्की डालियों से,
रेडियो सीलोन पर आती, 
तलत महमूद की थरथराती भीगी आवाज़ तक..
….
घबराहट और इंतज़ार,
इंतज़ार…
इंतज़ार और घबराहट,
….
 कल नौ चाँद बीते..वो नहीं आये....अब चाँद, सितारे, जुगनू, सूरज
मेरी रातों को ताना देते हैं-
नौ चाँद बीते..वो आये नहीं ?

राज

solitary suburban sky

घर के इस कोने में आ मीना कुमारी जी की पंक्तियाँ जबां पे आ जाती हैं..

जलती-बुझती-सी रौशनी के परे

सिमटा-सिमटा-सा एक मकां तन्हा

चाँद तन्हा है आसमां तन्हा..

My balcony

बालकॉनी में वसंत

मैं तो बस
देखता रहता हूँ
इन लाल होते पत्तों को..
नेरुदा होते तो पूछते
“आगामी वसंत की आगवानी में
क्या कुछ गुनगुनाती हैं सारी पत्तियां?”

 

New song…

आज से ठीक एक साल पहले तनु वेड्स मनु के गानों के गाने रिलीज़ हुए थे…आज रेकॉर्डिंग है एक नए गाने की.. हमारा दसवां गाना.. क्र्सना के साथ.. और गा रही हैं श्रेया घोषाल.. साल अच्छा है ..:)

सबमें वसंत बाँट देना

बिनी,
छत के उस कोने
जहाँ बोरियों में रखा सीमेंट जम गया है
सबसे छुपा
कुछ जिद्दी नवम्बर बो दिए हैं मैंने
देखते रहना ..
अपनी हंसी से सींचते रहना …
फरवरी तक, शर्माती हुयी  सिंदूरी कोंपले आ जाएंगी
फिर मार्च तक फल .
थोड़ा थोड़ा काट कर
सबमें वसंत बाँट देना